नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) पर पहली बार स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ‘कवच’ का नया वर्शन 4.0 सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। यह अपग्रेडेड सिस्टम हैदराबाद डिवीजन के मलकाजगिरी-कामारेड्डी सेक्शन में 108 रूट किलोमीटर पर लागू किया गया है।
कवच वर्शन 4.0, पहले इस्तेमाल हो रहे वर्शन 3.2 का उन्नत रूप है। साउथ सेंट्रल रेलवे पर पहले से 1,465 रूट किलोमीटर में कवच 3.2 के अनुभव के आधार पर इसमें कई तकनीकी सुधार किए गए हैं। नया वर्शन बेहतर सुरक्षा फीचर्स, ज्यादा भरोसेमंद परफॉर्मेंस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के साथ आता है। भारतीय रेलवे इसे पूरे नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना बना रही है।
कवच भारतीय रेलवे द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। यह लोको पायलटों को निर्धारित स्पीड लिमिट बनाए रखने में मदद करता है और जरूरत पड़ने पर अपने-आप ब्रेक लगा देता है। इसका मुख्य मकसद ‘सिग्नल पासिंग एट डेंजर’ (SPAD) को रोकना, इमरजेंसी में ट्रेन की स्पीड कंट्रोल करना और टक्कर के जोखिम को कम करना है। खराब मौसम में भी यह सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने में सहायक है।
नए वर्शन में कई अहम अपग्रेड किए गए हैं, जिनमें शामिल हैं: ट्रेन की सटीक लोकेशन के लिए बेहतर सटीकता बड़े यार्ड में सिग्नल की स्थिति की स्पष्ट जानकारी ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) के जरिए स्टेशन-टू-स्टेशन कम्युनिकेशन मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ सीधा इंटीग्रेशनअपग्रेडेड सिस्टम को रेलवे संचालन में इसकी अहम भूमिका के कारण सबसे ऊंचे सुरक्षा सर्टिफिकेशन ‘सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4’ (SIL-4) की जरूरत होती है।
कवच को लागू करने में कई घटक शामिल होते हैं। इनमें स्टेशनों और ब्लॉक सेक्शन पर ‘स्टेशन कवच’ लगाना, ट्रैक के साथ RFID टैग, टेलीकम्युनिकेशन टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल और लोकोमोटिव पर ‘लोको कवच’ उपकरण लगाना शामिल है। साउथ सेंट्रल रेलवे पर कवच वर्शन 4.0 के सफल लॉन्च से स्वदेशी रेलवे सुरक्षा तकनीक और मजबूत होगी। साथ ही पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर एडवांस्ड ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम के विस्तार का रास्ता और आसान बनेगा।