होली पर शराब प्रेमियों को निराशा, मनपसंद ब्रांड गायब, ओवररेट का खेल, ग्राहक गरम बीयर पीने को मजबूर

रायपुर। होली त्योहार के दौरान प्रदेश में शराब दुकानों की व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। भाजपा सरकार में आबकारी विभाग द्वारा बेहतर व्यवस्था के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कई दुकानों पर न तो मनपसंद ब्रांड उपलब्ध हैं और न ही निर्धारित दरों का पालन किया जा रहा है।
मनपसंद ऐप में दिख रहे ब्रांड, दुकानों में नदारद
ग्राहकों का कहना है कि मनपसंद ऐप में जिन बीयर और शराब ब्रांड्स की उपलब्धता दिखाई जाती है, वे दुकानों में नहीं मिलतीं। लोकप्रिय ब्रांड्स को “स्टॉक नहीं है” या “खत्म हो गया” बताकर ग्राहकों को जबरन अन्य ब्रांड थमा दिए जा रहे हैं। मीडिया टीम की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि कई जगहों पर पसंदीदा ब्रांड अंदर दबाकर रखे गए हैं।
शोले मसाला और गोवा ब्रांड में ओवररेटिंग
जांच में यह भी सामने आया कि
गोवा ब्रांड (एमआरपी 120 रुपये) को 130 रुपये में बेचा जा रहा है।
भनपुरी रिंग रोड स्थित गोगांव शराब दुकान में शोले मसाला (एमआरपी 100 रुपये) को 110 रुपये में बेचा गया।
यह अतिरिक्त वसूली चुनिंदा “रेगुलर” या पहचान वाले ग्राहकों को छोड़कर अधिकांश उपभोक्ताओं से की जा रही है।
बीयर ठंडी नहीं, बहाने बनाकर गरम बीयर की बिक्री
अधिकांश दुकानों में सिर्फ एक-दो कंपनियों की बीयर ही ठंडी मिल रही है, जबकि बाकी ब्रांड्स गरम हालत में दी जा रही हैं। दुकानदार “फ्रिज खराब है” का बहाना बनाते हैं, लेकिन रेगुलर ग्राहकों को उसी दुकान से ठंडी बीयर मिल जाती है, जिससे दोहरे मापदंड की पुष्टि होती है।
कांकेर में मिलावटी शराब की शिकायत
अगर कांकेर जिले की बात करें तो यहां स्थिति और भी गंभीर है। नरहरपुर की शराब दुकान में प्लेन और मसाला मदिरा में मिलावट की शिकायत मिली। जांच के दौरान दुकान के पीछे तीन खाली पानी के जार मिले, जिनमें से दो में शराब की गंध पाई गई। मौके पर मौजूद गार्ड नशे की हालत में था। दुकान प्रभारी को सूचना देने के बावजूद उनका मौके पर नहीं पहुंचना, उनकी भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
कोचियों के जरिए काली कमाई
रायपुर जिले के सरोना, रायपुरा, भनपुरी, भाटागांव सहित आउटर इलाकों की दुकानों में शराब कोचियों के जरिए ओवररेट पर बिक्री का आरोप है। लोकप्रिय ब्रांड को आम ग्राहकों को न देकर कोचियों को ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा है, जिससे अवैध मुनाफा कमाया जा रहा है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल
प्रदेश की अधिकांश दुकानों में या तो मनपसंद ब्रांड उपलब्ध नहीं हैं या फिर तय कीमत से ज्यादा पर बेचे जा रहे हैं। बीयर ठंडी रखने की व्यवस्था भी सिर्फ प्रीमियम दुकानों तक सीमित है। इन तमाम अनियमितताओं पर रोक लगाने में आबकारी विभाग पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है, जिससे अवैध कारोबार को खुला संरक्षण मिलने के आरोप लग रहे हैं।