नई दिल्ली। भारत सरकार की प्रमुख पहल ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ (बीबीबीपी) ने पिछले 11 वर्षों में एक लक्षित सरकारी योजना से आगे बढ़कर देशव्यापी जन-आंदोलन का रूप ले लिया है। यह पहल बालिकाओं के जीवन रक्षा, संरक्षण, शिक्षा और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक व्यवहारिक परिवर्तन लाने का माध्यम बनी है।
22 जनवरी 2015 को शुरू की गई ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना घटते बाल लिंग अनुपात और लैंगिक भेदभाव की चुनौती से निपटने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त पहल के रूप में संचालित यह योजना बालिका के जन्म से लेकर शिक्षा और सशक्तिकरण तक उसके समग्र विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर बल देती है।
पिछले एक दशक में योजना के तहत किए गए प्रयासों का असर प्रमुख लैंगिक संकेतकों में दिखाई दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंग अनुपात 2014-15 में 918 था, जो बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है। यह सुधार कन्या भ्रूण हत्या रोकने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और बालिकाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के प्रयासों को दर्शाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय की एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 2014-15 में 75.51% था, जो 2024-25 में बढ़कर 80.2% हो गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अधिक बालिकाएं स्कूलों में दाखिला ले रही हैं और अपनी शिक्षा जारी रख रही हैं।
बीबीबीपी योजना बालिका के जीवन के प्रत्येक चरण पर ध्यान केंद्रित करती है। इसमें सुरक्षित और सम्मानजनक जन्म, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण को शामिल किया गया है। योजना के तहत सामुदायिक सहभागिता, जन-जागरूकता अभियानों और विभिन्न मंत्रालयों तथा राज्यों के समन्वय के माध्यम से व्यवहारिक परिवर्तन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कहा है कि वह बीबीबीपी के ढांचे को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि देश की प्रत्येक बालिका को सुरक्षा, शिक्षा और अवसर मिल सकें। मंत्रालय का मानना है कि बालिकाओं का सशक्तिकरण महिला नेतृत्व वाले विकास और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।