हरित अर्थव्यवस्था से बनेंगे नए रोजगार के अवसर, युवाओं की भूमिका अहम: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में भारत का तेजी से बढ़ता कदम युवाओं के लिए “हरित रोजगार” और “हरित उद्यमिता” के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि सतत विकास के इस परिवर्तन में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।
जामिया मिलिया इस्लामिया में आयोजित “21वीं सदी में पर्यावरण स्थिरता: विज्ञान, समाज और समाधान” विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि भारत का विकास मॉडल हरित विकास की ओर एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है।
उन्होंने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, हरित ईंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे भारत कम कार्बन उत्सर्जन वाले सतत विकास मॉडल की ओर तेजी से बढ़ेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि 19,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश से समर्थित यह पहल स्वच्छ औद्योगिक परिवर्तन की मजबूत नींव रख रही है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक के दौर में निरंतर नवाचार जरूरी है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के उदाहरण से उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर किफायती नवाचारों के जरिए पारंपरिक वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जा रहा है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि आने वाले समय में सौर ऊर्जा, बैटरी निर्माण, ग्रिड प्रबंधन और जैव ईंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे। साथ ही प्रयुक्त खाद्य तेल से जैव ईंधन बनाने जैसी पहलें चक्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी।
उन्होंने समुद्री ऊर्जा को भविष्य का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए कहा कि भारत की लंबी तटरेखा इस दिशा में बड़े अवसर प्रदान करती है। साथ ही परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
डॉ. सिंह ने 1 लाख करोड़ रुपए के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष का जिक्र करते हुए कहा कि यह स्टार्टअप्स और नवोन्मेषकों को अपने विचारों को बड़े स्तर पर विकसित करने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला भारत जलवायु परिवर्तन से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) विजन के तहत भारत वैश्विक हरित परिवर्तन का नेतृत्व करने की स्थिति में है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्रों और युवा शोधकर्ताओं से सतत विकास के क्षेत्र में सक्रिय रूप से जुड़ने का आह्वान किया और कहा कि भविष्य युवाओं के नवाचार और संकल्प से तय होगा।