मालवाहक रेल कॉरिडोर के लिए छत्तीसगढ़ के इन 25 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित, खरीदी-बिक्री पर लगी रोक

भिलाई। पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत तक प्रस्तावित समर्पित मालवाहक रेल कॉरिडोर (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर संबंधित एसडीएम को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।
करीब 2100 से 2200 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर का उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक, खनिज और बंदरगाह क्षेत्रों को जोड़ना है। यह रेलमार्ग पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा। इस लाइन पर केवल मालगाड़ियां संचालित होंगी।
25 गांवों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव
दुर्ग जिले में यह कॉरिडोर दुर्ग, पाटन और भिलाई-3 तहसील के 25 गांवों से होकर गुजरेगा। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले लेन-देन रोकने के लिए जिला प्रशासन पहले ही संबंधित गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री, खाता विभाजन, अंतरण और व्यपवर्तन पर रोक लगा चुका है।
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दावा-आपत्ति के बाद तय होगा मुआवजा
अधिग्रहण के अगले चरण में प्रभावित भूमि का विवरण प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद भू-स्वामियों को दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। जनसुनवाई के बाद राजस्व विभाग और रेलवे की संयुक्त टीम जमीन, मकान, कुएं, पेड़-पौधों तथा अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन करेगी। निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। भुगतान के बाद ही जमीन रेलवे को हस्तांतरित होगी।

जिले को मिलेगा औद्योगिक लाभ
कॉरिडोर बनने से दुर्ग जिला देश के दो बड़े व्यापारिक केंद्रों सूरत और दानकुनी से सीधे जुड़ जाएगा। इससे इस्पात, सीमेंट और अन्य उद्योगों को माल परिवहन में सुविधा मिलेगी। साथ ही मुख्य रेलवे लाइन पर मालगाडिय़ों का दबाव कम होने से यात्री ट्रेनों के संचालन में भी सुधार आएगा। निर्माण चरण में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। वहीं किसानों को अपनी उपज देश के बड़े बाजारों तक कम लागत और कम समय में पहुंचाने का विकल्प मिलेगा, जिससे कृषि और व्यापार दोनों क्षेत्रों को लाभ होने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, दानकुनी-सूरत मालवाहक रेल कॉरिडोर परियोजना से दुर्ग जिले के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि भूमि अधिग्रहण के कारण प्रभावित ग्रामीणों और किसानों की चिंताएं भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में पारदर्शी प्रक्रिया, उचित मुआवजा और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।