नारायणपुर। जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुरुषनार को पश्चिम अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है। जिला मुख्यालय से पास होने के बावजूद यह गांव लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों और हिंसा के प्रभाव से जूझता रहा। नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर यहां बालक आश्रम शाला और प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास का संचालन दोबारा शुरू किया गया है। वर्षों तक नक्सलवाद का दंश वाले इस गांव में स्थापित सुरक्षा कैंप को बालक आश्रम शाला और प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है। अब यहां 110 बच्चों को शिक्षा और आवास की सुविधा दी जा रही है।
बालक आश्रम के प्रभारी अधीक्षक सन्नु राम यादव ने बताया कि पहले यहां से करीब आधा किलोमीटर दूर बच्चों का आश्रम था। अब यहां बच्चों के खेल के साथ पढ़ाई और रहने की अच्छी सुविधा है। नक्सलियों की वजह से यहां कैंप लगाया गया था। अब नक्सलमुक्त होने के बाद इस कैंप से फोर्स जा चुकी है। सुरक्षाकैंप को बालक आश्रम शाला और प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास के रूप में उपयोग में लाया जा रहा है।
कुरुषनार के ग्रामीण मेघनाथ ने बताया कि वर्ष 2003 के आस-पास नक्सलियों ने गांव के पंचायत भवन को ध्वस्त कर दहशत फैलाई। इसके बाद भी यहां हिंसक घटनाओं और गोलीबारी का सिलसिला जारी रहा। ऐसे में कुरुषनार में संचालित होने वाला बालक आश्रम शाला को हटाकर गांव के एक शिक्षक के घर में शरण लेनी पड़ी। बाद में शिक्षक के कमरे से लगी जमीन पर अस्थायी व्यवस्था करते हुए आश्रम शाला के लिए भवन तैयार किया गया, जहां स्कूल और आश्रम का संचालन एक ही परिसर में होने लगा। नक्सली आए तो पुलिस फोर्स ने यहां कैंप बनाया,अब बहुत बदलाव हो गया है, हालात सुधर गए हैं, नक्सली भी नहीं हैं। बच्चे फिर से पढ़ाई करने यहां पहुंच गए हैं।
नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि भाटापाल के बाद कुरुषनार में केंद्रीय सुरक्षा बलों के खाली हुए परिसर को बालक आश्रम शाला के संचालन के लिए उपयोग में लाया गया है। इससे स्थानीय आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण में अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।