मछली पालन से महिलाओं की आय में बढ़ोतरी, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

रायपुर,4 जून 2026 कभी केवल जल संरक्षण का माध्यम माने जाने वाले गांवों के तालाब आज ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बन रहे हैं। जशपुर जिले के मनोरा और दुलदुला विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने मछली पालन को आजीविका का मजबूत साधन बनाकर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखी है। शासन के सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और सामूहिक प्रयासों ने इन महिलाओं के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है।
मनोरा विकासखंड के ग्राम भभरी में संचालित कमल महिला स्व-सहायता समूह पिछले तीन वर्षों से शासकीय तालाब में मछली पालन कर रहा है। ग्राम पंचायत से 10 वर्ष के पट्टे पर प्राप्त तालाब में समूह की महिलाओं ने मेहनत और बेहतर प्रबंधन के बल पर इस कार्य को लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। समूह को प्रतिवर्ष लगभग 6 लाख रुपये का विक्रय प्राप्त हो रहा है, जिससे महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
इसी तरह दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा का दीप महिला स्व-सहायता समूह भी शासकीय तालाब में मछली पालन कर प्रतिवर्ष लगभग 6.93 लाख रुपये की आय अर्जित कर रहा है। इस अतिरिक्त आय ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई दी है।
समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले सीमित आय के कारण परिवार की जरूरतें पूरी करना चुनौती था, लेकिन अब वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू आवश्यकताओं पर बेहतर ढंग से खर्च कर पा रही हैं। इन समूहों की सफलता ने यह साबित किया है कि यदि शासकीय योजनाओं का लाभ लिया जाए तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण की मिसाल बन सकती हैं।